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कांग्रेस ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के लिए चार नेताओं का नाम किया तय

Category: politics

Published: December 18, 2024

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कांग्रेस ने आगामी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के लिए अपने चार नेताओं के नाम फाइनल कर दिए हैं। ये नेता “वन नेशन, वन इलेक्शन” (एक देश-एक चुनाव) मुद्दे पर कांग्रेस का पक्ष रखेंगे। कांग्रेस द्वारा फाइनल किए गए नामों में प्रियंका गांधी, रणदीप सुरजेवाला, मनीष तिवारी और सुखदेव भगत का समावेश है। ये सभी सांसद अब जेपीसी में अपनी पार्टी का पक्ष रखने के लिए तैयार होंगे।

जेपीसी का गठन लोकसभा के स्पीकर द्वारा किया जाएगा, और इसमें राज्यसभा एवं लोकसभा दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे। यह समिति किसी भी प्रस्ताव, मुद्दे या विधेयक की पूरी समीक्षा करती है और इसके बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजती है। सरकार रिपोर्ट के आधार पर विधेयक को सदन में पेश करती है।

कांग्रेस के नामों की सिफारिश
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने अपने कोटे से जेपीसी में मनीष तिवारी, प्रियंका गांधी, सुखदेव भगत और रणदीप सुरजेवाला का नाम फाइनल किया है। इन चार नेताओं को पार्टी द्वारा भेजा जाएगा और इनकी भूमिका “वन नेशन-वन इलेक्शन” पर सरकार के प्रस्ताव के बारे में चर्चा करने और अपनी राय देने की होगी।

मनीष तिवारी और रणदीप सुरजेवाला दोनों ही वकील हैं, जो कानून और संविधान के मामलों में अच्छी खासी समझ रखते हैं। वहीं, सुखदेव भगत आदिवासी समुदाय के महत्वपूर्ण नेता माने जाते हैं, जबकि प्रियंका गांधी महिलाओं के नेतृत्व का प्रतीक बनकर समिति में हिस्सा लेंगी।

इंडिया गठबंधन से भी सदस्य
संयुक्त विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल पार्टियां भी जेपीसी में अपने प्रतिनिधि भेज सकती हैं। डीएमके पार्टी के पी विल्सन, जो कि एक प्रसिद्ध वकील हैं, को जेपीसी में मौका मिल सकता है। इसके अलावा, डीएमके के एक और सांसद टी सेल्वागेथी का नाम भी इस समिति के लिए चर्चित है। समाजवादी पार्टी (सपा) से धर्मेंद्र यादव का नाम इस समिति में जुड़ सकता है, जो पहले ही “वन नेशन-वन इलेक्शन” पर सपा का पक्ष रख चुके हैं।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से भी कल्याण बनर्जी और साकेत गोखले के नामों की चर्चा है, जो इस समिति का हिस्सा बन सकते हैं।

जेपीसी के सदस्य संख्या का निर्धारण
जेपीसी में कितने सदस्य होंगे, इसका निर्णय लोकसभा के स्पीकर करेंगे। यह समिति राज्यसभा और लोकसभा दोनों के सदस्यों से मिलकर बनेगी, हालांकि आमतौर पर लोकसभा के सदस्यों की संख्या राज्यसभा के मुकाबले दोगुनी होती है।

सरकार के लिए विशेष बहुमत जरूरी
“वन नेशन-वन इलेक्शन” विधेयक एक संवैधानिक संशोधन है, और इसके लिए सरकार को विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि सरकार इस मुद्दे पर जेपीसी के जरिए व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। जेपीसी की रिपोर्ट पर आधारित संशोधित बिल को सरकार सदन में पेश करेगी, और यदि इसे पारित किया जाता है, तो यह भारतीय चुनाव प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

कुल मिलाकर, “वन नेशन-वन इलेक्शन” पर संयुक्त संसदीय समिति में महत्वपूर्ण चर्चा होने वाली है, और कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर अपनी पूरी ताकत लगा रही हैं।

Writer: brajeshkumar872

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