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रूस द्वारा कैंसर की वैक्सीन बनाने का दावा: क्या यह बीमारी पर काबू पा सकेगी?

Category: politics

Published: December 18, 2024

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रूस ने हाल ही में कैंसर के इलाज के लिए एक नई वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है, जिसे अगले साल से अपने नागरिकों को मुफ्त में देने की योजना है। यह वैक्सीन एक mRNA तकनीक पर आधारित है, जो कैंसर ट्यूमर के विकास को रोकने में मदद करने का दावा करती है। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के निदेशक आंद्रेई कप्रीन ने इस बात की जानकारी दी और कहा कि यह वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल में सफल रही है। वर्तमान में कैंसर की चिकित्सा में कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियेशन थेरेपी जैसी पारंपरिक उपचार विधियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इन विधियों का प्रभाव हमेशा स्थायी नहीं होता। ऐसे में यदि यह mRNA वैक्सीन सचमुच प्रभावी साबित होती है, तो यह कैंसर के इलाज में एक बड़ी क्रांति ला सकती है।

हालांकि, रूस के इस दावे के बीच विशेषज्ञों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि क्या यह वैक्सीन वाकई कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को काबू में कर पाएगी। डॉ. अंशुमान कुमार, जो धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक हैं, का कहना है कि यह घोषणा राजनीतिक दृष्टिकोण से की गई है, न कि पूरी तरह से मेडिकल जानकारी के आधार पर। हालांकि, अगर यह वैक्सीन काम करती है, तो इससे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी, जो कैंसर से लड़ने में मदद करेगी।

रूस के अलावा, यूके में भी इस तरह की एक वैक्सीन फरवरी 2024 से मरीजों को दी जा रही है, और अमेरिका में इस पर ट्रायल जारी हैं। यदि यह वैक्सीन सफल रहती है, तो इससे कीमोथेरेपी जैसी पारंपरिक उपचार विधियों की आवश्यकता कम हो सकती है, जो कैंसर मरीजों के लिए एक राहत की बात होगी।

भारत में भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, अगले पांच वर्षों में भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या में 12% का इज़ाफा हो सकता है, और इसमें युवा पीढ़ी भी तेजी से शामिल हो रही है। नेचर जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों की सबसे बड़ी वजह हमारी बदलती जीवनशैली है।

भारत में कैंसर के उपचार के लिए स्वास्थ्य बजट का बहुत कम हिस्सा अनुसंधान पर खर्च किया जाता है। वर्तमान में भारत का स्वास्थ्य बजट GDP का 1.9% है, जिसमें से केवल 1.2% रिसर्च पर खर्च किया जाता है। यदि भारत इस हिस्से को बढ़ाता है, तो हम भी इस तरह की mRNA वैक्सीन विकसित कर सकते हैं, जिससे कैंसर के मरीजों को लाभ मिल सकता है। इस समय, कैंसर जैसी बीमारी का इलाज बहुत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन रूस के नए दावे से उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को अब यह देखना होगा कि इस वैक्सीन का कितना प्रभावी परिणाम होता है और क्या यह वाकई कैंसर के खिलाफ एक कारगर उपाय साबित हो सकता है।

Writer: neelamsingh116

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