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रविचंद्रन अश्विन: किडनैप होने से लेकर दुनिया के सबसे बेहतरीन स्पिनर बनने तक की कहानी.

Category: sports

Published: December 18, 2024

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रविचंद्रन अश्विन, भारतीय क्रिकेट का वो नाम जो टेस्ट क्रिकेट के सबसे सफल गेंदबाजों में गिना जाता है, अपनी मेहनत और संघर्ष की अनोखी कहानी के लिए भी जाने जाते हैं। उनका सफर केवल क्रिकेट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में कई दिलचस्प मोड़ आए हैं। अश्विन का करियर 14 सालों का रहा है, जिसमें उन्होंने भारत को कई मैचों में जीत दिलाई और खुद को क्रिकेट के इतिहास में एक खास स्थान बना लिया। आइए जानते हैं उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में, जिनसे उनकी सफलता का राज उजागर होता है।

क्रिकेट में अक्सर विरोधी टीमों के खिलाड़ी अपनी ताकत और खेलने की शैली को लेकर एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन अश्विन के मामले में एक और दिलचस्प घटना घटी। यह घटना तब हुई जब अश्विन एक टेनिस बॉल मैच में खेल रहे थे। उस समय एक विरोधी टीम के चार-पाँच फैंस और सदस्य, जो रॉयल इनफील्ड बाइक पर थे, अश्विन को किडनैप करने के लिए उनके पास पहुंचे। उनका मकसद सिर्फ इतना था कि अश्विन उस मैच में हिस्सा न ले सकें। अश्विन ने इस घटना का जिक्र एक इंटरव्यू में किया था, जिसमें उन्होंने बताया कि वो लोग उन्हें पिक करने के बहाने अपने साथ ले गए थे ताकि वह मुकाबला ना खेल सकें।

जब अश्विन ने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, तो वह मिडियम पेस गेंदबाज थे। हालांकि, यह उनकी असल पहचान नहीं थी। उनका असली टैलेंट तब सामने आया जब उनके स्कूल के कोच, सीके विजयकुमार ने उन्हें ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह दी। यह तब की बात है जब अश्विन 11वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे और नेट्स पर मिडियम पेस गेंदबाजी कर रहे थे। थकावट के कारण अश्विन ने कोच से पूछा कि क्या वह ऑफ स्पिन गेंदबाजी कर सकते हैं। कोच विजयकुमार ने इसे मंजूरी दी और अश्विन की ऑफ स्पिन गेंदबाजी को देखकर वह समझ गए कि यही उनका असली टैलेंट है।

कोच ने इसके बाद अश्विन से मिडियम पेस करने को मना किया और उन्हें ऑफ स्पिन करने की सलाह दी। विजयकुमार का मानना था कि अगर अश्विन ऑफ स्पिन गेंदबाज बनते हैं, तो उनका भविष्य उज्जवल होगा। इसके बाद, अश्विन ने कभी मिडियम पेस गेंदबाजी नहीं की और पूरी तरह से ऑफ स्पिन गेंदबाजी में खुद को ढाल लिया। यह कह सकते हैं कि स्कूल के कोच विजयकुमार का अश्विन के करियर में अहम योगदान था। जैसे धोनी को उनके कोच ने फुटबॉल के गोलकीपर से क्रिकेट के विकेटकीपर बनने की सलाह दी थी, उसी तरह विजयकुमार ने अश्विन को ऑफ स्पिन गेंदबाजी करने की सलाह दी, जो बाद में उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

अश्विन ने अपने इंटरनेशनल करियर के 14 सालों में क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में शानदार प्रदर्शन किया। टेस्ट क्रिकेट में वह भारत के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज बनकर उभरे, उनके नाम 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट दर्ज हैं। पूरे इंटरनेशनल करियर की बात करें तो अश्विन ने कुल 765 विकेट हासिल किए हैं। उनका प्रदर्शन टेस्ट क्रिकेट में तो लाजवाब था ही, साथ ही उन्होंने वनडे और टी20 क्रिकेट में भी भारत के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। अश्विन की सफलता केवल उनकी तकनीकी क्षमता का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह उनकी निरंतरता और मेहनत का भी नतीजा था। उनका आत्मविश्वास और मैदान पर उनकी रणनीतिक सोच ने उन्हें टीम इंडिया का सबसे महत्वपूर्ण मैच विनर बना दिया।

Writer: neelamsingh116

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