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संसद में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक पेश, जेपीसी के पास विचार के लिए भेजा गया विधेयक.

Category: politics

Published: December 17, 2024

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने चुनाव सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से संबंधित विधेयक को संसद में पेश किया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024’ पेश किया। यह विधेयक चुनाव सुधारों के तहत देशभर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में पहल करता है। इसके बाद विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव किया गया। हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे संविधान के संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए आलोचना की है।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक को संसद में पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही संविधान में संशोधन के लिए इसे राज्यों की मंजूरी भी लेनी होगी। संविधान के अनुच्छेद 368(2) के तहत न्यूनतम 50% राज्यों की सहमति जरूरी होगी। ऐसे में गैर-बीजेपी शासित राज्य इसका विरोध कर सकते हैं। विधि आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव का संविधान के अनुच्छेद 328 पर भी प्रभाव पड़ेगा। बीजेपी के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि लोकसभा में वर्तमान में एनडीए के पास 292 सीटें हैं, जबकि दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 सीटों की जरूरत है। राज्यसभा में भी एनडीए के पास 112 सीटें हैं, जो दो-तिहाई बहुमत से काफी दूर है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं, जिससे विधेयक पारित कराना और कठिन हो सकता है।

इस विधेयक का विरोध करने वालों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), समाजवादी पार्टी (सपा), आम आदमी पार्टी (आप), आरजेडी, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), जेएमएम और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सहित 15 दल शामिल हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यह संविधान के संघीय ढांचे को कमजोर करता है। दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस, बीजेडी और टीआरएस जैसे कुछ क्षेत्रीय दल इसका समर्थन कर रहे हैं। मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद यह दूसरी बार है जब किसी विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया है। इससे पहले वक्फ संशोधन विधेयक को भी जेपीसी के पास विचार के लिए भेजा गया था। इस बार ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के लिए इसे जेपीसी के पास भेजा गया है।

जेपीसी में लोकसभा और राज्यसभा से सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जिसमें संख्या के आधार पर बीजेपी का दबदबा रहेगा। इससे यह संभावना बढ़ जाती है कि विचार-विमर्श के दौरान बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की राय प्रमुख रहेगी। वक्फ बोर्ड से जुड़े विधेयक की जेपीसी की अध्यक्षता बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने की थी, और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी ऐसा ही देखने को मिल सकता है। मोदी सरकार का मानना है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से चुनावी खर्चों में भारी कटौती होगी। बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य रुक जाते हैं और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग होता है। सरकार का दावा है कि एक साथ चुनाव से इन समस्याओं का समाधान होगा। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों को बार-बार चुनावी ड्यूटी से छुटकारा मिलेगा, जिससे उनकी उत्पादकता में वृद्धि होगी।

विपक्षी दलों का तर्क है कि यह विधेयक संविधान के संघीय ढांचे को कमजोर करता है। उनका कहना है कि केंद्र और राज्यों के चुनाव एक साथ कराने से राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित होगी। इसके अलावा, क्षेत्रीय दलों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त मंच नहीं मिलेगा। जेपीसी में विचार-विमर्श के बाद विधेयक को संसद में फिर से पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि वह आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है और इसी उद्देश्य से विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया है।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े इस विधेयक ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। जहां सरकार इसे चुनाव सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मान रहा है। अब देखना होगा कि यह विधेयक आगे क्या रूप लेता है।

Writer: neelamsingh116

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