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2025 विधानसभा चुनाव: बिहार में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों पर एक नज़र

Category: politics

Published: December 17, 2024

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बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। सियासी हलचल बढ़ चुकी है, और मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नाम उभरकर सामने आ रहे हैं। ये नेता अपनी-अपनी पार्टियों के लिए जमीन पर सक्रिय हैं और जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। आइए जानते हैं इन प्रमुख दावेदारों के बारे में। बिहार की राजनीति का चर्चित चेहरा नीतीश कुमार लगभग 18 वर्षों से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रमुख नीतीश कुमार को एनडीए गठबंधन ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है। हालांकि, नीतीश 2004 से अब तक विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े हैं। वे विधानपरिषद के माध्यम से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते रहे हैं।

2020 के चुनाव में उनके विधानसभा चुनाव न लड़ने पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। तेजस्वी यादव ने उस समय नीतीश को चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती दी थी। वर्तमान में जदयू के पास 45 विधायक और 12 लोकसभा सांसद हैं। पार्टी का बिहार में मजबूत जनाधार है और नीतीश का अनुभव एनडीए के लिए बड़ी ताकत मानी जा रही है, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। तेजस्वी वर्तमान में बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और दो बार राज्य के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं।

2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी को पहली बार मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। उस चुनाव में आरजेडी को 75 सीटें मिलीं, जो किसी भी पार्टी के लिए सबसे अधिक थीं। वर्तमान में आरजेडी के पास 75 विधायक और 4 लोकसभा सांसद हैं। युवा और ऊर्जावान तेजस्वी को आरजेडी का भविष्य माना जा रहा है। प्लुरल्स पार्टी की प्रमुख पुष्पम प्रिया 2020 के चुनावों में चर्चा में आईं थीं, जब उन्होंने अखबारों में विज्ञापन देकर खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया था। हालांकि, उनकी पार्टी उस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, और खुद पुष्पम की जमानत जब्त हो गई थी।

पुष्पम प्रिया इस बार भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं। वे सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही हैं और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटी हुई हैं। प्रशांत किशोर, जो एक समय बड़े-बड़े नेताओं के लिए चुनावी रणनीतियां बनाते थे, अब खुद मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं। उन्होंने 2022 में पदयात्रा शुरू कर बिहार की राजनीति में कदम रखा। उनकी पार्टी जनसुराज सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

प्रशांत महिलाओं और युवाओं को अपनी मुख्य ताकत बना रहे हैं। जातीय समीकरणों के साथ वे राज्य की जनता को विकास और बदलाव का वादा कर रहे हैं। बिहार के मूल निवासी प्रशांत के लिए यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला होगा। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भी मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल हैं। वे कांग्रेस के साथ गठबंधन के जरिए अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं। पप्पू ने 2015 में भी मुख्यमंत्री बनने का सपना देखा था, लेकिन पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई। पप्पू यादव को जनता का कितना समर्थन मिलेगा, यह उनकी पार्टी और कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर निर्भर करता है।

पशुपति पारस और जीतन राम मांझी भी मुख्यमंत्री पद की रेस में हैं। मांझी पहले बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और इस समय एनडीए के साथ हैं। दूसरी ओर, पारस केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और अपनी पार्टी के दम पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। दोनों नेता चुनाव के बाद बनने वाली परिस्थितियों पर अपनी रणनीति केंद्रित कर रहे हैं। बिहार में मुख्यमंत्री पद के लिए यह चुनाव दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ अनुभवी नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव जैसे स्थापित चेहरे हैं, तो दूसरी ओर पुष्पम प्रिया और प्रशांत किशोर जैसे नए खिलाड़ी भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जनता किसे अपना समर्थन देती है, यह 2025 के चुनाव परिणाम तय करेंगे।

Writer: neelamsingh116

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