!-- Topbar Start -->
Trending
Loading...

“संभल के 300 साल पुराने कार्तिक शंकर मंदिर का पुनर्निर्माण, अतिक्रमण हटाकर फिर से शुरू हुई पूजा-अर्चना”

Category: politics

Published: December 16, 2024

News Image

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के खग्गू सराय इलाके में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर, जिसे 46 सालों तक बंद रखा गया था, अब प्रशासन द्वारा पुनः खोला गया है। यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और इसके आसपास के क्षेत्र में पहले हिंदू परिवारों की अच्छी खासी संख्या थी। लेकिन 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद यहां के हिंदू परिवारों ने इस इलाके से पलायन कर लिया। इसके बाद से मंदिर का भी हाल-बेहाल हो गया और कई हिस्सों पर अतिक्रमण किया गया। यह मंदिर कार्तिक शंकर मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां पहले करीब 40 से 42 हिंदू परिवार रहते थे और यह स्थान धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था। मंदिर के पास एक पीपल का पेड़ और एक प्राचीन कुआं भी था, जो गांववासियों के लिए आस्था का केंद्र था। लोग सुबह-शाम मंदिर में पूजा-अर्चना करते और कुएं के पास भजन-कीर्तन करते थे। लेकिन 1978 में हुए दंगों ने इस इलाके का रूप बदल दिया। इसके बाद से हिंदू परिवार इस क्षेत्र से पलायन कर गए और मंदिर की स्थिति खराब होती चली गई।

82 वर्षीय विष्णु शरण रस्तोगी, जो इस क्षेत्र के पुराने निवासी हैं, बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने इस मंदिर को बनवाया था। वे कहते हैं, “हमारे समय में मंदिर के पास एक बगीचा था और लोग रोजाना पूजा करने आते थे। 1978 के बाद स्थिति बदल गई और हिंदू परिवार यहां से चले गए। मंदिर में पूजा अर्चना भी बंद हो गई।” रस्तोगी जी का कहना है कि पहले इस इलाके में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच भाईचारे के अच्छे रिश्ते थे, लेकिन दंगे के बाद यह संबंध टूट गए और हिंदू परिवारों ने अपनी ज़मीनें और मकान बेचकर यहां से पलायन कर लिया।

मंदिर की देखभाल में भारी लापरवाही के कारण इसकी स्थिति खराब हो गई थी। मंदिर के चारों ओर जो चार फीट का परिक्रमा मार्ग था, वह अतिक्रमणकारियों द्वारा बंद कर दिया गया था। इसके अलावा, मंदिर के शिखर पर भी छज्जे निकाल लिए गए थे। विष्णु शरण रस्तोगी बताते हैं कि मंदिर के ताले की चाबी उनके परिवार के पास थी, लेकिन वह कई दशकों तक खोला नहीं गया था और न ही इसमें पूजा अर्चना हुई। वे कहते हैं, “हमने 40 साल पहले एक पुजारी को नियुक्त किया था, लेकिन अतिक्रमण के कारण पुजारी ने वहां जाना बंद कर दिया था।”

प्रशासन ने जब अतिक्रमण की सूचना प्राप्त की, तो एक टीम मौके पर भेजी गई। टीम ने मंदिर की सफाई की और पाया कि मंदिर में एक शिवलिंग के अलावा हनुमान जी की मूर्ति भी थी। इसके साथ ही, एक प्राचीन कुआं भी मिला, जिसकी खुदाई में तीन और मूर्तियां प्राप्त हुईं। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर की पुनर्निर्माण प्रक्रिया अब शुरू की जाएगी और जल्द ही इस ऐतिहासिक स्थल को पुनः जनता के लिए खोला जाएगा।

मंदिर के परिसर में अतिक्रमण की एक और अहम जानकारी यह है कि अतिक्रमणकारियों ने कुएं को पूरी तरह से बंद कर दिया था और उसके ऊपर एक रैंप बना दिया था, ताकि गाड़ियां खड़ी की जा सकें। यह रैंप भी बिना अनुमति के बनाया गया था। इसके अलावा, मंदिर की भूमि पर भी अवैध कब्जा किया गया था, जो स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया था। अब, जब मंदिर को फिर से खोला गया है, तो यह स्थानीय लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है। विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि वे बहुत खुश हैं कि प्रशासन ने इस प्राचीन मंदिर को फिर से खोजा और अब यहां पूजा अर्चना का अवसर मिलेगा। वे उम्मीद करते हैं कि अब हिंदू समुदाय के लोग फिर से इस मंदिर में आकर पूजा करेंगे और इलाके की पुरानी धार्मिक परंपराएं फिर से जीवित होंगी।

संभल के इस क्षेत्र में जहां एक समय धार्मिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल थी, वहां अब अतिक्रमण और सांप्रदायिक तनाव के कारण स्थिति बदल गई है। लेकिन इस मंदिर के पुनः उद्घाटन के साथ, यह उम्मीद की जा सकती है कि इस इलाके में फिर से शांति और सद्भाव की मिसाल कायम होगी।

Writer: neelamsingh116

श्रेणियाँ

सभी देखें

Newsletter

Aliqu justo et labore at eirmod justo sea erat diam dolor diam vero kasd

Sit eirmod nonumy kasd eirmod

Newseye .in

Volup amet magna clita tempor. Tempor sea eos vero ipsum. Lorem lorem sit sed elitr sed kasd et

© Newseyedigital. All Rights Reserved. Designed by searchcraftdigital