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“राहुल गांधी का सावरकर पर बयान, महाराष्ट्र में कांग्रेस-शिवसेना के रिश्तों में बढ़ सकती है तनातनी”

Category: politics

Published: December 14, 2024

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राहुल गांधी ने करीब दो साल बाद वीर सावरकर को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है, लेकिन सावरकर को “माफी वीर” कहने का बयान महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) के बीच तनाव को बढ़ा सकता है। यह बयान खासतौर पर उस समय आया है जब पहले ही दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक रिश्ते कुछ अच्छे नहीं चल रहे हैं और हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद दोनों के बीच आलोचनाएं तेज हुई हैं।

संसद में संविधान पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। खासतौर पर शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे द्वारा सावरकर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में राहुल ने सावरकर को “माफी वीर” कह दिया। राहुल गांधी ने कहा, “मैंने एक बार इंदिरा गांधी से सावरकर के बारे में पूछा था, तो उन्होंने मुझे बताया था कि सावरकर अंग्रेजों के साथ मिल गए थे।” इस बयान से न सिर्फ सावरकर, बल्कि केंद्र की सरकार पर भी हमला किया गया।

राहुल ने आगे कहा कि सावरकर का भारतीय संविधान से कोई ताल्लुक नहीं था क्योंकि वे मनुस्मृति को मानते थे, जो संविधान के खिलाफ था। उन्होंने यह भी कहा कि सावरकर डर कर अंग्रेजों से माफी मांग चुके थे। इस पर सदन में हंगामा मच गया, लेकिन कांग्रेस के सांसद राहुल के इस बयान से खुश नजर आए।

राहुल गांधी का यह बयान खासतौर पर महाराष्ट्र की राजनीति पर असर डाल सकता है। शिवसेना (उद्धव गुट) सावरकर को हमेशा वीर मानती रही है, और उद्धव ठाकरे ने सार्वजनिक रूप से सावरकर का समर्थन किया है। ऐसे में राहुल का यह बयान शिवसेना और कांग्रेस के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना सकता है। सावरकर पर टिप्पणी करने से बचने के लिए कांग्रेस और शिवसेना के बीच 2022 में एक समझौता हुआ था, लेकिन अब राहुल ने दो साल बाद सावरकर पर फिर से अपनी राय दी है।

यह मामला पहले भी विवादों में आ चुका था, जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर के मुद्दे पर टिप्पणी की गई थी। उस समय शिवसेना (उद्धव) के नेता संजय राउत ने सावरकर को वीर बताया था और राहुल से आग्रह किया था कि वह सावरकर के विषय को न उठाएं। इसके बाद दोनों पार्टियों के बीच सावरकर पर कोई टिप्पणी न करने का एक अनौपचारिक समझौता हुआ था।

राहुल के बयान के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। चुनावी नतीजों के बाद से ही उद्धव ठाकरे की पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाए थे कि महाविकास अघाड़ी की हार के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी। शिवसेना (उद्धव गुट) ने दावा किया था कि कई सीटों पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने उनके उम्मीदवारों का समर्थन नहीं किया था। उदाहरण के लिए, सोलापुर दक्षिण सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता सुशील कुमार शिंदे ने निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दिया था, जिससे शिवसेना के उम्मीदवार को नुकसान हुआ।

इसके अतिरिक्त, विधानसभा चुनावों में हार के बाद अब शिवसेना (उद्धव गुट) का ध्यान आगामी मुंबई नगर निगम चुनावों पर है। मुंबई में हिंदुत्व और मराठा मुद्दे हमेशा से ही अहम रहे हैं, और उद्धव की पार्टी इस बार इन मुद्दों पर ज्यादा सख्त रुख अपनाने की संभावना है। कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) के बीच यह तनाव और भी बढ़ सकता है, खासकर जब दोनों पार्टियों के रिश्ते पहले से ही कमजोर हैं। राहुल गांधी का यह बयान उस गठबंधन को और मुश्किल में डाल सकता है, जो पहले ही चुनावी हार के बाद दरकने की स्थिति में है। शिवसेना (उद्धव) की नजर अब मुंबई नगर निगम चुनाव पर है, जहां वह कांग्रेस के खिलाफ अलग रणनीति अपनाने की कोशिश कर सकती है।

Writer: neelamsingh116

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