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संसद में संविधान पर चर्चा, भाजपा और कांग्रेस में तीखी बहस.

Category: politics

Published: December 14, 2024

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संविधान को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। शुक्रवार (13 दिसंबर) को संसद में संविधान पर विशेष चर्चा की शुरुआत हुई, जहां दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर संविधान को मनमाने ढंग से बदलने का आरोप लगाया, तो प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा पर संविधान बदलने की कोशिश का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि भाजपा लोकसभा में पूर्ण बहुमत से आती, तो संविधान का बदला जाना तय था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जनता के बीच जाकर भाजपा पर अंकुश लगाया। प्रियंका ने अपने भाषण में स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं और संविधान निर्माताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही संविधान है जो देश के हर नागरिक को अधिकार देता है। उन्होंने जोर दिया कि यह संविधान किसी भी सत्ता को झुकने पर मजबूर कर सकता है।

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने संविधान बचाने को प्रमुख मुद्दा बनाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर जनसभा में संविधान की प्रति लेकर भाजपा पर संविधान बदलने का आरोप लगाया। इस रणनीति ने असर दिखाया, और भाजपा पूर्ण बहुमत (272 सीटें) से पीछे रह गई। हालांकि, सहयोगी दलों के समर्थन से नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने में सफल रहे। कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं के मन में यह धारणा बिठा दी कि भाजपा सत्ता में आने पर संविधान में बड़ा बदलाव करेगी। इस कारण भाजपा को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा।

संसद में चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में सबसे अधिक बार संविधान बदला। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने कार्यकाल में 17 बार संविधान संशोधित किया। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 28 बार और राजीव गांधी ने 10 बार संविधान में बदलाव किए। यूपीए सरकार के दौरान मनमोहन सिंह ने भी 7 बार संविधान संशोधित किया। राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विनायक दामोदर सावरकर का जिक्र किया, जिसके बाद कांग्रेस सांसदों ने सदन में हंगामा कर दिया। इस चर्चा को लेकर दोनों पार्टियों ने पहले से ही अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था।

संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर केंद्र सरकार ने वर्षभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की। यह आयोजन 26 नवंबर 2024 को शुरू हुआ। इसी दिन 1949 में भारतीय संविधान का निर्माण पूरा हुआ था। कार्यक्रम के तहत संविधान की ऐतिहासिक यात्रा पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जा रही है। इसके अलावा एक स्मारक सिक्का, डाक टिकट और दो किताबों का विमोचन किया गया है। संविधान की मूल प्रति में 395 अनुच्छेद थे, लेकिन 106 संशोधनों के बाद अब यह संख्या बढ़कर 470 हो गई है। इसके बावजूद संवैधानिक गणना में अनुच्छेदों की संख्या 395 ही है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार मुसलमानों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर रही है। अखिलेश ने यह भी कहा कि जातिवार जनगणना की मांग को नजरअंदाज करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में महात्मा गांधी का जिक्र नहीं किया, जो देश की आजादी के मुख्य सूत्रधार थे।

चर्चा से पहले संसद हमले की 23वीं बरसी पर श्रद्धांजलि दी गई। 13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकवादियों ने संसद पर हमला किया था। इस घटना में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, एक महिला कांस्टेबल और दो सुरक्षा गार्ड शहीद हुए थे। पिछले 75 वर्षों में संविधान ने लोकतंत्र को कायम रखने में अहम भूमिका निभाई है। यह सत्ता के दुरुपयोग पर अंकुश लगाता है और देश को एकजुट रखने का माध्यम है। संविधान पर संसद में बहस से यह साफ है कि सभी राजनीतिक दल इसके महत्व को स्वीकार करते हैं, भले ही वे इसे लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहें।

Writer: neelamsingh116

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