Category: politics
Published: December 13, 2024
राज्यसभा में शुक्रवार को सभापति जगदीप धनखड़ और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच एक बार फिर तीखी नोकझोंक हुई। दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा। बहस का मुख्य कारण विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सभापति का रवैया और सत्ता पक्ष के प्रति उनकी कथित सहानुभूति रही।सभापति धनखड़ ने विपक्ष पर असंवैधानिक और अनुचित आचरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन में किसानों और मजदूरों के लिए भी जगह है। इस दौरान उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा, “मैं कमजोर नहीं हूं, देश के लिए मर-मिटने के लिए तैयार हूं।”
खरगे ने पलटवार करते हुए कहा, “मैं भी किसान मजदूर का बेटा हूं। आप हमें दबाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो सकेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि धनखड़ विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रहे हैं और उनके सदस्यों का अपमान कर रहे हैं। इस विवाद की शुरुआत अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा से हुई। धनखड़ ने स्पष्ट किया कि अविश्वास प्रस्ताव को 14 दिन बाद सदन के पटल पर रखा जाएगा। इस दौरान विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी बोलने के लिए उठे, लेकिन धनखड़ ने उन्हें कानून पढ़ने की नसीहत दे दी।
धनखड़ ने कहा, “आपका काम है सही तरीके से कानून को समझना। मैं सब सुन रहा हूं और सहन कर रहा हूं। लेकिन यह स्पष्ट है कि किसान अब केवल खेतों तक सीमित नहीं हैं। वह हर क्षेत्र में सक्रिय हैं।” खरगे ने सभापति पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सत्ता पक्ष को बोलने का अधिक मौका देते हैं और विपक्ष को दबाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, “जो सभापति मेरी इज्जत नहीं कर रहे हैं, मैं उनकी इज्जत कैसे कर सकता हूं?” खरगे ने आगे कहा, “आप हमारे लोगों का अपमान करते हैं। आपसे अपेक्षा है कि आप नियमों के अनुसार सदन चलाएं। सत्ता पक्ष के लोग नियम तोड़ते हैं, लेकिन उन्हें बोलने दिया जाता है।”
बीते एक साल में पांच बार भिड़े खरगे और धनखड़
यह पहला मौका नहीं था जब खरगे और धनखड़ के बीच बहस हुई हो। बीते एक साल में दोनों के बीच पांच बार तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ है।
1. 9 दिसंबर 2024: जॉर्ज सोरोस मामले में गांधी परिवार को निशाने पर लेने पर खरगे ने धनखड़ पर नियम विरुद्ध सदन चलाने का आरोप लगाया।
2. 2 जुलाई 2024: जयराम रमेश पर टिप्पणी को लेकर खरगे ने कहा कि धनखड़ का दलितों के प्रति नजरिया पक्षपाती है।
3. 27 जून 2024: नीट के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए खरगे विपक्ष के साथ वेल में पहुंचे। इस पर धनखड़ ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का वेल में आना अनुचित है।
4. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस: मोहन भागवत के बयान पर दोनों के बीच तीखी बहस हुई।
5. 24 नवंबर 2024: अडानी मुद्दे पर चर्चा को लेकर दोनों में तीखा टकराव हुआ।
सदन में क्या हुआ आगे?
शुक्रवार की बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन भी बोलने के लिए उठे, लेकिन धनखड़ ने उन्हें रोक दिया। डीएमके के सांसद तिरुचि शिवा ने सरकार के विवादास्पद बयानों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। आखिरकार, सदन की कार्यवाही को बढ़ते हंगामे के कारण सोमवार तक स्थगित कर दिया गया। यह घटनाक्रम संसद के माहौल में गहराते तनाव को दर्शाता है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती खाई लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही है।
Writer: neelamsingh116
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