Category: politics
Published: December 12, 2024
केंद्र सरकार ने ‘एक देश, एक चुनाव’ (वन नेशन, वन इलेक्शन) योजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दे दी है। सूत्रों का कहना है कि इसे वर्तमान संसद सत्र में पेश किया जा सकता है। बिल पर विस्तृत चर्चा के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे जाने की संभावना है।
कैबिनेट ने इस योजना के तहत पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। सरकार चाहती है कि इस विधेयक पर सभी दलों और हितधारकों के बीच आम सहमति बनाई जाए। इसके लिए व्यापक विचार-विमर्श की योजना बनाई गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि संयुक्त संसदीय समिति इस विधेयक पर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से चर्चा करेगी। इसके अलावा, सभी राज्य विधानसभाओं के स्पीकरों को भी बुलाया जाएगा। साथ ही, प्रबुद्ध वर्ग और आम जनता से भी राय लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस चर्चा के केंद्र में ‘एक देश, एक चुनाव’ के लाभ, चुनौतियाँ और इसे लागू करने के संभावित तरीके होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे विधेयक पर आम सहमति बन सकेगी। सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने के लिए रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। इस समिति ने मार्च 2024 में सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। 18,626 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट को तैयार करने में 191 दिनों तक विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श किया गया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में चुनावों को दो चरणों में आयोजित करने की सिफारिश की है। पहले चरण में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया गया है। दूसरे चरण में 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाकर 2029 तक किया जा सकता है, ताकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें। इसके अतिरिक्त, अगर किसी विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है या हंग असेंबली की स्थिति बनती है, तो शेष अवधि के लिए नए चुनाव कराए जा सकते हैं कोविंद समिति ने चुनाव आयोग को लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची तैयार करने की सिफारिश की है। साथ ही, सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ ईवीएम और अन्य चुनावी संसाधनों की एडवांस प्लानिंग का सुझाव भी दिया गया है।
रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली इस समिति में आठ सदस्य शामिल थे। इनमें गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, डीपीए नेता गुलाम नबी आजाद, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे, 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह, लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप, और पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी शामिल हैं। ‘एक देश, एक चुनाव’ का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है। सरकार का मानना है कि इससे चुनावी खर्च में कमी आएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी।
1951 से 1967 तक भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ ही होते थे। लेकिन राज्यों के पुनर्गठन और नई विधानसभाओं के गठन के बाद यह व्यवस्था बाधित हो गई। अब इस मॉडल को फिर से लागू करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने इस विधेयक पर आम राय बनाने के लिए हरसंभव प्रयास शुरू कर दिए हैं। यदि यह बिल पास होता है, तो देश की चुनावी प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। हालांकि, इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सभी राजनीतिक दलों और राज्यों का सहयोग आवश्यक होगा।
Writer: neelamsingh116
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