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“युवराज सिंह की कहानी: दो वर्ल्ड कप जीतने वाले हीरो से विलेन बनने तक का सफर”

Category: sports

Published: December 12, 2024

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साल 2007 में भारत ने टी20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचा था, और इस सफलता में सबसे अहम योगदान युवराज सिंह का था। इसके बाद, 2011 वर्ल्ड कप में भी युवराज ने अपनी शानदार बल्लेबाजी और गेंदबाजी से भारत को 28 साल बाद चैंपियन बनाने में मदद की। उस वर्ल्ड कप में उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब मिला, और उनके द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट की दुनिया का सुपरस्टार बना दिया। लेकिन 2014 में ऐसा कुछ हुआ, जिसने उन्हें हीरो से विलेन बना दिया।

6 अप्रैल, 2014 की रात शायद युवराज सिंह के लिए सबसे बुरी रात थी। यह दिन था टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल, जब भारत का मुकाबला श्रीलंका से मीरपुर में हो रहा था। युवराज सिंह के लिए यह मैच दुखद साबित हुआ। जिस खिलाड़ी को ‘सिक्सर किंग’ के नाम से जाना जाता था, उसी खिलाड़ी ने इस महत्वपूर्ण मुकाबले में एक बेहद खराब पारी खेली। युवराज ने इस मैच में 21 गेंदों पर सिर्फ 11 रन बनाए, और उनका स्ट्राइक रेट केवल 52.38 रहा, जो टी20 क्रिकेट के हिसाब से बेहद शर्मनाक था। इस दौरान, उन्होंने 9 गेंदें डॉट खेलीं और एक भी बाउंड्री नहीं मारी।

युवराज का ये संघर्षपूर्ण प्रदर्शन भारत के लिए बहुत महंगा साबित हुआ। भारतीय टीम 20 ओवरों में केवल 130 रन ही बना पाई, जो कि श्रीलंका के खिलाफ बेहद छोटा लक्ष्य था। श्रीलंका ने इस लक्ष्य को मात्र 13 गेंदों पहले ही 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया और दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीत लिया।

भारत की हार के बाद भारतीय फैंस की नाराजगी का सामना युवराज को करना पड़ा। चंडीगढ़ में उनके घर पर पत्थर फेंके गए और कई फैंस ने उन्हें दोषी ठहराया। युवराज सिंह ने खुद इस हार की जिम्मेदारी ली और कहा कि उनकी धीमी बल्लेबाजी के कारण टीम इंडिया को यह मैच हारना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि वह उस दिन अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से बहुत दूर थे और इसे लेकर उन्हें गहरी निराशा थी। युवराज ने कहा, “मैंने कुछ ओवरों में काफी डॉट गेंद खेली। श्रीलंका के मर्लिंगा ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। मैंने खुद ही माना कि मैंने खराब खेला, और यह वर्ल्ड कप फाइनल था, इसलिए यह नुकसान और भी बड़ा हो गया।”

लेकिन युवराज सिंह ने इस मुश्किल दौर में भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कठिनाईयों का सामना किया और अपनी मेहनत जारी रखी। 2017 तक उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की और फिर से अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही आईपीएल में भी युवराज का जलवा देखने को मिला। जिस साल उन्हें टी20 वर्ल्ड कप हारने का दोषी ठहराया गया था, उसी साल उन्हें आईपीएल में आरसीबी ने 14 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा। इसके अलावा, 2015 में दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें 16 करोड़ रुपये में खरीदा, और वह उस सीजन के सबसे महंगे भारतीय क्रिकेटर बने।

युवराज सिंह की कहानी एक बड़ा संदेश देती है। वह हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में कभी-कभी हम हीरो से विलेन बन जाते हैं, लेकिन अगर हम मेहनत करते रहें और कठिनाइयों का सामना करते रहें, तो हमारे समय में बदलाव आ सकता है। उनके द्वारा निभाई गई भूमिका और खेल में संघर्ष ने साबित कर दिया कि असफलताओं के बाद भी एक मजबूत वापसी संभव है।

Writer: neelamsingh116

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