Category: politics
Published: December 12, 2024
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल का दौर जारी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर सहमति बनने के बाद अब मंत्रिमंडल के विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच आज उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने अपनी पत्नी और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल सहित अन्य नेताओं के साथ शरद पवार से उनके घर पर मुलाकात की।
आज एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का 84वां जन्मदिन है। अजित पवार ने कहा कि यह मुलाकात महज जन्मदिन की शुभकामनाएं देने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए थी। उन्होंने साफ किया कि इस बैठक में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। हालांकि, दोनों के बीच यह मुलाकात काफी लंबी चली, जिससे राजनीतिक हलकों में कयासों का दौर जारी है।
अजित पवार ने एक दिन पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि यह बैठक मंत्रिमंडल के विभागों के बंटवारे को लेकर थी। तीनों दलों—भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी—के बीच अब तक विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय भाजपा के पास ही रहेगा और यह शिंदे गुट को नहीं दिया जाएगा। जल्द ही विभागों के बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
महाराष्ट्र विधानसभा के पिछले चुनाव में अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी ने शानदार प्रदर्शन किया। एनसीपी ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा और 41 सीटों पर जीत हासिल की। इसके विपरीत, शरद पवार की पार्टी को केवल 10 सीटों पर ही सफलता मिली। हालांकि अजित पवार और शरद पवार के बीच हुई मुलाकात को जन्मदिन की औपचारिकता बताया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे अलग नजरिए से देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में सरकार बनाने के बाद से ही महायुति के तीनों घटक दलों के बीच आपसी खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं।
अजित पवार की शाह और नड्डा से हुई बैठक ने इस बात को और हवा दी है कि एनसीपी की भूमिका को लेकर भाजपा और शिवसेना के भीतर मतभेद हो सकते हैं। गृह मंत्रालय का शिवसेना को न दिया जाना और भाजपा द्वारा इस अहम विभाग को अपने पास रखने की खबरें इसे और मजबूत करती हैं। शरद पवार का महाराष्ट्र की राजनीति और एनसीपी पर गहरा प्रभाव है। भले ही अजित पवार ने एनसीपी का एक अलग धड़ा बना लिया हो, लेकिन शरद पवार की राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में यह मुलाकात सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि राजनीतिक मायनों में भी देखी जा रही है।
मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर जल्द ही घोषणा होने की संभावना है। इसके साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही खींचतान पर भी विराम लग सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि महायुति के अंदर भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के बीच सत्ता संतुलन कैसे बनता है। महाराष्ट्र में चल रहे इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अजित पवार और शरद पवार की मुलाकात के बाद आने वाले समय में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Writer: neelamsingh116
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