Category: politics
Published: January 09, 2025
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 5 फरवरी को होगा और वोटों की गिनती 8 फरवरी को की जाएगी। चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बड़ा बयान देते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) से साथ मिलकर चुनाव लड़ने की अपील की है।
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता संजय राउत ने कहा है कि दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि फिलहाल शिवसेना ने यह तय नहीं किया है कि वह किस पार्टी का समर्थन करेगी, लेकिन उनकी प्राथमिकता यही है कि दोनों पार्टियां साथ आएं। राउत ने कहा, “हमारी असली दुश्मन बीजेपी है, न कि कांग्रेस या आप।” महाराष्ट्र की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना एक साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ खड़ी हुई थीं। इसी तरह दिल्ली में भी अगर कांग्रेस और आप साथ आती हैं तो बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन तैयार हो सकता है।
संजय राउत ने पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के उस बयान का भी समर्थन किया जिसमें उन्होंने कांग्रेस और आप के संभावित गठबंधन की वकालत की थी। चव्हाण ने कहा था कि आप की दिल्ली में स्थिति मजबूत है और अगर दोनों पार्टियां साथ चुनाव लड़ें तो इसका फायदा उन्हें मिलेगा। राउत ने यह भी साफ किया कि इंडिया गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए बना था, लेकिन स्थानीय चुनावों में फैसले स्थानीय स्तर पर होने चाहिए। उन्होंने कहा, “यहां की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए स्थानीय नेताओं को ही चुनाव की रणनीति तय करनी चाहिए।”
हालांकि दिल्ली में कांग्रेस और आप के बीच हालिया दिनों में खटास बढ़ी है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कुछ दिन पहले अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें राष्ट्रविरोधी कहा था। इस बयान पर आप ने कड़ी आपत्ति जताई और माकन से माफी की मांग की थी। दिल्ली कांग्रेस के कई नेता लगातार आप सरकार के दस साल के शासन को ‘कुशासन’ करार देते रहे हैं। कांग्रेस का उद्देश्य इस चुनाव में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करना है, जबकि आम आदमी पार्टी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
शुरुआत में यह संभावना जताई जा रही थी कि कांग्रेस और आप साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन बाद में दोनों ही दलों ने इस पर विराम लगा दिया। हालांकि शिवसेना के इस नए बयान के बाद एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है कि बीजेपी को रोकने के लिए दोनों पार्टियां साथ आ सकती हैं। शिवसेना ने दिल्ली चुनाव में अपने संभावित कदम के बारे में कहा कि फिलहाल वे कांग्रेस और आप के बीच गठबंधन की स्थिति का इंतजार कर रहे हैं। राउत ने कहा कि अगर दोनों दल साथ आते हैं तो बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत चुनौती पेश की जा सकती है।
दिल्ली में आप का वोट बैंक काफी मजबूत है, जबकि कांग्रेस यहां अपनी पुरानी ताकत को वापस पाने की कोशिश कर रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में आप ने प्रचंड जीत हासिल की थी, वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी को यहां पिछले कुछ चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। शिवसेना ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य बीजेपी को हराना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और आप इस अपील पर क्या रुख अपनाते हैं।
Writer: neelamsingh116
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