Category: politics
Published: January 08, 2025
डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हमेशा चर्चा में रही हैं, और अब उनके निशाने पर ग्रीनलैंड है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि ग्रीनलैंड को लेकर वह हर संभव कदम उठाएंगे, जिसमें सैन्य हस्तक्षेप तक शामिल हो सकता है। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। जैसे ही उनके बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर का विमान ग्रीनलैंड पहुंचा, यह चर्चा और तेज हो गई। कुछ समय पहले तक इस मामले को मजाक मानने वाले विश्लेषकों ने भी इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।
ग्रीनलैंड, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप, खनिज संसाधनों और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप की योजना इसे अमेरिका का अगला अलास्का बनाने की है।
1867 में अमेरिका ने रूस से अलास्का $7.2 मिलियन में खरीदा था। उस समय रूस ने इसे बेकार संपत्ति समझा, लेकिन यह सौदा अमेरिका के लिए फायदेमंद साबित हुआ। अलास्का की खनिज संपदा और सामरिक स्थिति ने अमेरिका की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया। आज ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का रुख भी कुछ ऐसा ही नजर आता है।
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां से रूस और यूरोप पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। यदि अमेरिका इसे हासिल करता है तो उसकी उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक क्षेत्र में पकड़ और मजबूत हो जाएगी। ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिजों, तेल और गैस के विशाल भंडार हैं। ये संसाधन अमेरिका के औद्योगिक विकास और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। बर्फ तेजी से पिघलने के कारण ग्रीनलैंड में नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं। ये मार्ग व्यापार और सैन्य परिवहन के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं। ग्रीनलैंड को अपने अधीन करने से अमेरिका की भौगोलिक स्थिति मजबूत होगी, जिससे रूस और चीन के मुकाबले उसकी ताकत और बढ़ जाएगी।
डेनमार्क की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए ग्रीनलैंड एक बोझ बन चुका है। यदि डेनमार्क इस द्वीप को बेचता है तो उसे वित्तीय राहत मिल सकती है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां अमेरिका के लिए अनुकूल क्यों हैं? रूस फिलहाल यूक्रेन के युद्ध में उलझा हुआ है, जिससे उसकी प्राथमिकता अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नहीं है। चीन का पूरा फोकस ताइवान पर है। ऐसे में वह अमेरिका की इस रणनीति का कड़ा विरोध नहीं कर पाएगा। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों के कारण वैश्विक ध्यान बंटा हुआ है, जिसका फायदा अमेरिका उठा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाएं इस वक्त प्रभावहीन साबित हो रही हैं। ऐसे में अमेरिका के लिए अपनी योजनाओं को अंजाम देना आसान हो सकता है। ट्रंप ने डेनमार्क को ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव दिया है। डेनमार्क की बिगड़ती अर्थव्यवस्था और ग्रीनलैंड के भारी खर्च को देखते हुए यह संभव है कि वह इस सौदे पर विचार करे। हालांकि, यह सौदा डेनमार्क की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप का उद्देश्य ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल कर अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाना है। अगर वह इस कदम में सफल होते हैं तो वे अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन की तरह याद किए जाएंगे, जिन्होंने अलास्का का अधिग्रहण किया था। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या डेनमार्क इस प्रस्ताव को मानेगा और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय ट्रंप की इस महत्वाकांक्षा को स्वीकार करेगा। डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड पर नजर रखना न केवल उनकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है, बल्कि इससे वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव भी आ सकता है। यदि यह सौदा होता है तो अमेरिका की ताकत और सामरिक स्थिति कई गुना बढ़ जाएगी।
Writer: neelamsingh116
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